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Sales Order Kya Hota Hai? Invoice से अंतर और उदाहरण
Sales Order ग्राहक का ऑर्डर पक्का होने पर बनता है, Invoice माल देने पर। हिस्सों में डिलीवरी के उदाहरण से समझें दोनों का अंतर, सही क्रम और आम गलतियाँ।
संक्षेप में
सेल्स ऑर्डर (SO) वह दस्तावेज़ है जो विक्रेता ग्राहक का ऑर्डर स्वीकार करने पर बनाता है, जिसमें माल, मात्रा, रेट और डिलीवरी की तारीख तय होती है। यह माल भेजने से पहले बनता है और इस पर GST नहीं लगता; GST और पेमेंट की माँग इनवॉइस से होती है, जो माल भेजते समय बनता है।
- सेल्स ऑर्डर ऑर्डर की पुष्टि है, बिक्री नहीं — इस पर GST की देनदारी नहीं बनती और ग्राहक इस पर ITC नहीं ले सकता।
- ग्राहक जो परचेज़ ऑर्डर (PO) भेजता है, उसी के जवाब में विक्रेता सेल्स ऑर्डर बनाता है; एक ही सौदे के ये दो पहलू हैं।
- एक सेल्स ऑर्डर पर कई डिलीवरी और कई इनवॉइस बन सकते हैं; हर लाइन पर कितना गया और कितना बाकी है, यह ट्रैक करना ज़रूरी है।
- माल भेजते समय टैक्स इनवॉइस (या बिना बिक्री के डिलीवरी चालान) बनता है — सेल्स ऑर्डर उसकी जगह नहीं ले सकता।

Sales Order (SO) क्या है?
सेल्स ऑर्डर (Sales Order) वह दस्तावेज़ है जो विक्रेता (Seller) तब बनाता है जब उसे किसी ग्राहक से ऑर्डर मिलता है और वह उसे स्वीकार कर लेता है। इसमें लिखा होता है:
- कौन-सा माल और कितनी मात्रा
- किस रेट पर, कितना डिस्काउंट
- डिलीवरी कब और कहाँ होगी
- पेमेंट की शर्तें
सेल्स ऑर्डर माल भेजने से पहले बनता है। यह विक्रेता की तरफ़ से कहता है: “आपका ऑर्डर मिल गया, हम इसे इन शर्तों पर पूरा करेंगे।”
सेल्स ऑर्डर किस क्रम में आता है?
एक आम B2B सौदा इस क्रम में चलता है:
- कोटेशन — आप रेट का ऑफ़र भेजते हैं।
- परचेज़ ऑर्डर (PO) — ग्राहक अपनी तरफ़ से ऑर्डर भेजता है।
- सेल्स ऑर्डर (SO) — आप ऑर्डर स्वीकार करके अपनी किताबों में दर्ज करते हैं।
- डिलीवरी चालान (ज़रूरत हो तो) — माल भेजा जाता है।
- टैक्स इनवॉइस — बिक्री दर्ज होती है और पेमेंट माँगा जाता है।
हर कारोबार में हर कदम ज़रूरी नहीं। छोटी दुकान में कोटेशन से सीधे बिल बन जाता है। लेकिन जहाँ ऑर्डर बड़ा हो और माल किस्तों में जाए, वहाँ सेल्स ऑर्डर के बिना हिसाब बिगड़ जाता है। कोटेशन के बारे में Quotation क्या है में और ग्राहक की तरफ़ के कागज़ के बारे में Purchase Order क्या है में पढ़ें।
Sales Order और Invoice में क्या अंतर है?
| आधार | Sales Order | Tax Invoice |
|---|---|---|
| कब बनता है | ऑर्डर स्वीकार करते समय | माल भेजते समय या सेवा देने के बाद |
| मक़सद | ऑर्डर की पुष्टि | पेमेंट की माँग और टैक्स का रिकॉर्ड |
| GST की देनदारी | नहीं | हाँ |
| ग्राहक का ITC | नहीं मिलता | मिलता है (B2B में) |
| खाते में बिक्री | दर्ज नहीं होती | दर्ज होती है |
| स्टॉक | नहीं घटता | घटता है |
| एक सौदे में कितने | आम तौर पर एक | एक या कई (हिस्सों में डिलीवरी) |
एक उदाहरण: हिस्सों में डिलीवरी
एक डिस्ट्रीब्यूटर को किराना होलसेलर से 500 पैकेट का ऑर्डर मिलता है, ₹40 प्रति पैकेट। मान लीजिए GST 18% है।
सेल्स ऑर्डर SO-0112:
- 500 × ₹40 = ₹20,000
- GST 18% = ₹3,600 (सिर्फ़ जानकारी के लिए)
- ऑर्डर की कुल वैल्यू: ₹23,600
गोदाम में अभी 300 पैकेट हैं। पहली खेप में 300 जाते हैं:
| खेप | मात्रा | टैक्सेबल वैल्यू | GST 18% | इनवॉइस की रकम | ऑर्डर में बाकी |
|---|---|---|---|---|---|
| इनवॉइस 1 | 300 | ₹12,000 | ₹2,160 | ₹14,160 | 200 |
| इनवॉइस 2 | 200 | ₹8,000 | ₹1,440 | ₹9,440 | 0 |
| कुल | 500 | ₹20,000 | ₹3,600 | ₹23,600 |
ध्यान दें: GST दो बार, दो इनवॉइस पर, उस महीने देय हुआ जिसमें माल गया — ऑर्डर की तारीख पर नहीं। अगर दूसरी खेप अगले महीने गई, तो उसका GST भी अगले महीने के रिटर्न में जाएगा।
बिना सेल्स ऑर्डर के यहीं गड़बड़ होती है। दस दिन बाद कोई नहीं बता पाता कि 200 पैकेट भेजने बाकी हैं या 150, और ग्राहक का फ़ोन आने पर रजिस्टर पलटने पड़ते हैं।
Sales Order का फ़ॉर्मेट (भरा हुआ नमूना)
सेल्स ऑर्डर का कोई सरकारी फ़ॉर्मेट नहीं है, क्योंकि यह टैक्स का दस्तावेज़ नहीं है। लेकिन एक अच्छे ऑर्डर में ये चीज़ें होती हैं — ऊपर वाले डिस्ट्रीब्यूटर के ऑर्डर का नमूना:
| हिस्सा | नमूना |
|---|---|
| शीर्षक | SALES ORDER (ताकि कोई इसे बिल न समझे) |
| ऑर्डर नंबर और तारीख | SO-0112, 03-10-2026 |
| विक्रेता | आपका नाम, पता, GSTIN |
| ग्राहक | होलसेलर का नाम, बिलिंग पता, GSTIN |
| डिलीवरी का पता | अगर बिलिंग पते से अलग हो — इसी से तय होता है कि CGST+SGST लगेगा या IGST |
| ग्राहक का PO नंबर | PO/2026/0458, 02-10-2026 |
| आइटम | नाम, HSN, मात्रा (500 पैकेट), यूनिट, रेट (₹40), डिस्काउंट |
| टैक्स | GST 18% — ₹3,600 (सिर्फ़ अनुमान; असली टैक्स इनवॉइस पर) |
| डिलीवरी | 300 पैकेट 06-10-2026 तक, बाकी 20-10-2026 तक |
| पेमेंट की शर्त | हर इनवॉइस से 30 दिन |
| वैधता और शर्तें | रेट 31-10-2026 तक, उसके बाद की डिलीवरी पर नया रेट; ऑर्डर बदलना या रद्द करना लिखित में |
“सिर्फ़ अनुमान” वाली लाइन मामूली नहीं है: अगर डिलीवरी से पहले GST रेट बदल गया, तो बिल नए रेट पर बनेगा, ऑर्डर वाले पर नहीं — अगला उदाहरण यही दिखाता है।
उदाहरण 2: ऑर्डर के बाद GST रेट बदल गया
यह सच में हुआ: 22 सितंबर 2025 से घी पर GST 12% से घटकर 5% हो गया (GST Rates 2026: पूरी लिस्ट)।
एक डेयरी डिस्ट्रीब्यूटर ने 15 सितंबर 2025 को एक मिठाई की दुकान से ऑर्डर लिया: 50 जार घी, ₹600 प्रति जार। ग्राहक ने अभी पैसे नहीं दिए; माल 25 सितंबर को गया, बिल उसी दिन बना और पेमेंट अक्टूबर में आया।
| सेल्स ऑर्डर (15 सितंबर) | टैक्स इनवॉइस (25 सितंबर) | |
|---|---|---|
| टैक्सेबल वैल्यू | 50 × ₹600 = ₹30,000 | ₹30,000 |
| GST | 12% = ₹3,600 (अनुमान) | 5% = ₹1,500 (CGST ₹750 + SGST ₹750) |
| कुल | ₹33,600 | ₹31,500 |
बिल 5% पर बनेगा, क्योंकि माल, बिल और पेमेंट — तीनों रेट बदलने के बाद हुए। रेट बदलने के समय सप्लाई की तारीख धारा 14 के नियमों से तय होती है, और इस मामले में तीनों बाद के हैं, इसलिए नया रेट लगता है। ग्राहक को ₹2,100 कम देने होंगे, और यह फ़ायदा उसे देना ही चाहिए।
अगर एडवांस रेट बदलने से पहले मिला होता, या बिल पहले बन गया होता, तो धारा 14 के नियम अलग नतीजा देते हैं। ऐसे मामले में बिल बनाने से पहले अपने CA से पूछें।
सबक: सेल्स ऑर्डर पर GST की रकम को पक्का वादा न लिखें। “टैक्स इनवॉइस की तारीख के लागू रेट से” जैसी शर्त ऑर्डर पर जोड़ दें।
उदाहरण 3: ऑर्डर पर एडवांस मिला
ऑर्डर पक्का करते समय ग्राहक अक्सर एडवांस देता है। इस पर GST माल और सेवा में अलग है:
माल (goods) का ऑर्डर: एडवांस पर GST नहीं लगता। 15 नवंबर 2017 से (Notification 66/2017-Central Tax) माल के एडवांस पर टैक्स देय नहीं है; GST तब लगता है जब माल के साथ टैक्स इनवॉइस बनता है। ऊपर वाले 500 पैकेट के ऑर्डर पर ₹10,000 एडवांस मिला, तो आज GST नहीं — दोनों इनवॉइस पर पूरा GST लगेगा, और एडवांस इनवॉइस की रकम में से घटेगा।
सेवा (services) का ऑर्डर: एडवांस मिलते ही उस पर GST देय होता है, और आपको Receipt Voucher (Rule 50) जारी करना होता है। मान लीजिए किसी मशीन की सालाना सर्विस का ऑर्डर लिया और ₹29,500 एडवांस मिला, जिसमें 18% GST शामिल है:
- टैक्सेबल वैल्यू = 29,500 × 100 ÷ 118 = ₹25,000
- GST = ₹4,500 (CGST ₹2,250 + SGST ₹2,250), एडवांस वाले महीने के रिटर्न में
बाद में जब सेवा का टैक्स इनवॉइस बनेगा, तो एडवांस पर दिया गया GST उसमें समायोजित होगा। Receipt voucher का पूरा तरीका Payment Receipt और Receipt Voucher में पढ़ें।
सेल्स ऑर्डर के फ़ायदे
- बाकी ऑर्डर की साफ़ सूची — किस ग्राहक का कितना माल भेजना बाकी है, एक जगह दिखता है।
- ख़रीद और उत्पादन की योजना — खुले ऑर्डर देखकर पता चलता है कि कितना माल मँगाना या बनाना है।
- रेट पर विवाद नहीं — ऑर्डर के समय तय रेट लिखा रहता है, और इनवॉइस उसी से बनता है।
- हिस्सों में बिलिंग — हर खेप का अलग बिल, पर हिसाब एक ऑर्डर से जुड़ा।
सेल्स ऑर्डर में होने वाली आम गलतियाँ
- सेल्स ऑर्डर को ही बिल मान लेना। माल ऑर्डर की कॉपी के साथ भेज दिया और इनवॉइस नहीं बनाया — इससे GST रिटर्न में बिक्री छूट जाती है।
- ग्राहक के PO का नंबर न लिखना। बड़े ग्राहकों का अकाउंट विभाग PO नंबर के बिना पेमेंट रोक देता है।
- बाकी मात्रा का हिसाब हाथ से रखना। दो-तीन खेप के बाद गिनती गलत हो जाती है।
- रेट बदलने पर पुराना ऑर्डर वैसा ही छोड़ देना। फिर इनवॉइस पुराने रेट पर बन जाता है।
- रद्द ऑर्डर को बंद न करना। खुले ऑर्डर की सूची में वह सालों तक दिखता रहता है।
VyapRise में सेल्स ऑर्डर कैसे चलता है
- Sale Order मेन्यू से नया ऑर्डर बनाएँ, या कोटेशन की लिस्ट में मंज़ूर कोटेशन पर Convert to Sale Order चुनें।
- माल भेजने के समय ऑर्डर की लिस्ट में उस ऑर्डर पर Create Challan या Create Invoice चुनें। सिर्फ़ उतनी मात्रा डालें जितनी अभी जा रही है।
- ऑर्डर में हर लाइन पर दिखता है कि कितना डिलीवर हुआ, कितने का बिल बना और कितना बाकी है। बाकी माल के लिए अगली बार फिर यही करें।
VyapRise में स्टॉक और खाते की एंट्री इनवॉइस से होती है, ऑर्डर से नहीं। अगर पहले चालान बना, तो स्टॉक उस चालान से बने इनवॉइस पर घटता है। सेल्स ऑर्डर VyapRise के Pro प्लान (सालाना) में है, और फ्री ट्रायल में भी खुला रहता है। ऑर्डर ग्राहक को ईमेल नहीं होता — प्रिंट, PDF या फ़ोन के शेयर बटन से WhatsApp पर भेजें।
आगे क्या करें
कोटेशन से ऑर्डर, चालान और बिल तक की पूरी कड़ी कैसे चलती है, यह सेल्स और परचेज़ ऑर्डर सॉफ़्टवेयर पेज पर देखिए। चालान कब बनता है, यह डिलीवरी चालान क्या है में समझाया गया है।
VyapRise में यह काम कैसे होता है
हर लाइन पर बाकी माल (Pro)
Pro प्लान के Sale Order में हर आइटम के सामने दिखता है कि कितना डिलीवर हुआ, कितने का बिल बना और कितना बाकी है।
हिस्सों में डिलीवरी और बिल (Pro)
एक ऑर्डर से कई बार चालान या टैक्स इनवॉइस बनाएँ। हर बार सिर्फ़ बाकी मात्रा आगे आती है।
कोटेशन से ऑर्डर, ऑर्डर से बिल (Pro)
मंज़ूर कोटेशन से सीधे सेल ऑर्डर बनाएँ और ऑर्डर से चालान या इनवॉइस — कुछ दोबारा टाइप नहीं करना पड़ता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या Sales Order एक लीगल डॉक्यूमेंट है?
सेल्स ऑर्डर ग्राहक के ऑर्डर की लिखित स्वीकृति है। अगर दोनों पक्ष उसकी शर्तों पर सहमत हैं, तो यह एक समझौते का सबूत बन सकता है। लेकिन GST कानून में यह टैक्स का दस्तावेज़ नहीं है — टैक्स इनवॉइस की जगह इसे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
क्या सेल्स ऑर्डर पर GST लगता है?
नहीं। सेल्स ऑर्डर पर GST की देनदारी नहीं बनती। ऑर्डर पर GST की रकम सिर्फ़ जानकारी के लिए दिखाई जाती है। टैक्स तब देय होता है जब माल भेजते समय टैक्स इनवॉइस बनता है।
Sales Order और Purchase Order में क्या अंतर है?
दोनों एक ही सौदे के दो तरफ़ के कागज़ हैं। ख़रीदार अपने विक्रेता को परचेज़ ऑर्डर (PO) भेजता है। विक्रेता उस ऑर्डर को स्वीकार करके अपनी तरफ़ सेल्स ऑर्डर (SO) बनाता है। SO पर अक्सर ग्राहक के PO का नंबर भी लिखा जाता है।
क्या हर बिक्री के लिए सेल्स ऑर्डर बनाना ज़रूरी है?
नहीं। काउंटर पर तुरंत होने वाली बिक्री में सीधे बिल बनता है। सेल्स ऑर्डर तब काम आता है जब ऑर्डर आज मिले और माल बाद में या हिस्सों में जाए — जैसे डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर या ऑर्डर पर माल बनाने वाले कारख़ाने में।
ऑर्डर के बाद GST रेट बदल जाए तो बिल किस रेट पर बनेगा?
रेट वह लगता है जो सप्लाई की तारीख पर लागू हो, और रेट बदलने के समय यह तारीख धारा 14 से तय होती है। अगर माल, बिल और पेमेंट तीनों बदलाव के बाद हों, तो नया रेट लगेगा — जैसे 22 सितंबर 2025 के बाद भेजे घी पर 5%, भले ऑर्डर 12% के समय लिया गया हो। अगर एडवांस या बिल बदलाव से पहले का है, तो नतीजा अलग हो सकता है; ऐसे में CA से पूछें।
सेल्स ऑर्डर पर एडवांस मिले तो क्या GST देना होगा?
माल के ऑर्डर पर नहीं: Notification 66/2017-Central Tax (15 नवंबर 2017) से माल के एडवांस पर GST देय नहीं है, GST टैक्स इनवॉइस पर लगता है। सेवा के ऑर्डर पर हाँ: एडवांस मिलते ही GST देय होता है और Rule 50 के तहत Receipt Voucher जारी करना होता है।
ग्राहक ऑर्डर कम कर दे तो क्या करें?
अगर अभी तक बिल नहीं बना है, तो सेल्स ऑर्डर में मात्रा बदल दें या ऑर्डर बंद कर दें। अगर बिल बन चुका है और माल लौटता है, तो सेल्स ऑर्डर नहीं बल्कि उस इनवॉइस पर क्रेडिट नोट (सेल रिटर्न) बनेगा।