Billing
Purchase Order (PO) Kya Hota Hai? मतलब, Format और उदाहरण
PO kya hota hai: खरीदार का सप्लायर को लिखित ऑर्डर। PO का मतलब, उसमें क्या लिखें, ₹ में उदाहरण, PO vs Invoice, GST और PO-GRN-बिल का मिलान।
संक्षेप में
परचेज ऑर्डर (PO) वह लिखित ऑर्डर है जो खरीदार अपने सप्लायर को भेजता है, जिसमें सामान, मात्रा, तय रेट, GST, डिलीवरी की तारीख व जगह और पेमेंट की शर्तें लिखी होती हैं। सप्लायर के मान लेने पर यह दोनों के बीच पक्का समझौता बन जाता है; माल आने पर उसे PO से मिलाया जाता है, और पेमेंट सप्लायर के बिल पर होता है, PO पर नहीं।
- PO हमेशा खरीदार बनाता है और सप्लायर को भेजता है; Invoice सप्लायर बनाता है।
- PO पर GST नहीं भरा जाता और उस पर ITC नहीं मिलता; टैक्स सप्लायर के Tax Invoice पर लगता है।
- हर PO का अपना नंबर हो (जैसे PO/26-27/0045), ताकि सप्लायर का बिल और माल उसी नंबर से मिलाया जा सके।
- PO, GRN (माल की रसीद) और सप्लायर का बिल: तीनों मिलाकर ही पेमेंट करें — इसे 3-way match कहते हैं।
- आधा माल आए तो PO खुला रहता है; बाक़ी माल आने तक उसका बैलेंस दिखता रहता है।

Purchase Order (PO) क्या है?
परचेज ऑर्डर (Purchase Order या PO) वह लिखित ऑर्डर है जो खरीदार अपने सप्लायर को भेजता है। “PO kya hota hai” का सीधा जवाब: यह फ़ोन पर हुई बात को काग़ज़ पर पक्का करने का तरीका है। इसमें लिखा होता है:
- कौन-सा सामान या सेवा चाहिए (Item description)
- कितनी मात्रा में (Quantity और Unit)
- किस रेट पर तय हुआ है (Rate), और GST की दर
- डिलीवरी कब तक और कहाँ चाहिए
- पेमेंट की शर्तें — एडवांस, या बिल के कितने दिन बाद
सप्लायर PO मान लेता है तो यह दोनों के बीच पक्का समझौता बन जाता है। माल आने पर खरीदार उसे PO से मिलाता है, और पेमेंट सप्लायर के बिल पर करता है।
अंग्रेज़ी में यही विषय, PO-to-payment प्रोसेस के साथ: Purchase Order: Meaning, Format and Process।
PO का एक उदाहरण (₹ में)
मान लीजिए Shree Ganesh Hardware, अहमदाबाद को अपने सप्लायर Om Steel Traders से माल चाहिए:
| # | आइटम | HSN | मात्रा | रेट | रकम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | MS Hinge 4 इंच | 8302 | 200 पीस | ₹18 | ₹3,600 |
| 2 | Tower Bolt 6 इंच | 8302 | 150 पीस | ₹32 | ₹4,800 |
| 3 | SS Screw 1 इंच (बॉक्स) | 7318 | 40 बॉक्स | ₹95 | ₹3,800 |
| Taxable value | ₹12,200 | ||||
| GST 18% (अनुमान) | ₹2,196 | ||||
| कुल अनुमानित लागत | ₹14,396 |
ऊपर लिखा होगा: PO नंबर PO/26-27/0045, तारीख, डिलीवरी “10 दिन में दुकान पर”, पेमेंट “बिल से 30 दिन”। GST यहाँ सिर्फ़ अंदाज़ा है — असली GST Om Steel Traders के Tax Invoice पर लगेगा।
ऐसा PO अभी बिना साइन-अप बनाना हो तो फ्री परचेज ऑर्डर जनरेटर इस्तेमाल कीजिए।
PO में क्या-क्या लिखें (Format)
| हिस्सा | क्या लिखें |
|---|---|
| ऊपर | आपकी कंपनी का नाम, पता, GSTIN; शब्द “Purchase Order” |
| PO नंबर और तारीख | हर PO का अलग नंबर, जैसे PO/26-27/0045 |
| सप्लायर | नाम, पता, GSTIN |
| डिलीवरी का पता | जहाँ माल चाहिए — दुकान, गोदाम या साइट |
| आइटम टेबल | नाम, HSN, मात्रा, यूनिट, रेट, डिस्काउंट, GST % |
| कुल रकम | Taxable value, अनुमानित GST, कुल |
| शर्तें | डिलीवरी की तारीख, फ्रेट किसका, पेमेंट के दिन, क्वालिटी की शर्त |
| साइन | ऑर्डर देने वाले अधिकृत व्यक्ति का |
सबसे ज़रूरी चीज़ PO नंबर है। सप्लायर से कहिए कि अपने बिल और चालान पर यही नंबर लिखे, ताकि माल और बिल दोनों सही PO से जुड़ें।
PO कैसे काम करता है: 5 स्टेप
- ज़रूरत तय करें और PO बनाएँ — कौन-सा माल, कितना, किस रेट पर। कम स्टॉक वाले आइटम से शुरू करें।
- सप्लायर को भेजें — PDF, ईमेल या WhatsApp से।
- सप्लायर पुष्टि करे — रेट और डिलीवरी मान ले। यहीं से सौदा पक्का।
- माल आए, GRN बनाएँ — गिनती और क्वालिटी चेक करके माल की रसीद (Goods Receipt Note) बनाइए। जो कम आया या ख़राब निकला, वहीं लिख लीजिए।
- बिल मिलाएँ, फिर पेमेंट — सप्लायर का बिल PO और GRN से मिलाइए; तीनों सही हों तभी पेमेंट।
3-way match: पेमेंट से पहले तीन काग़ज़ मिलाइए
| काग़ज़ | सवाल |
|---|---|
| PO | क्या मँगाया था, किस रेट पर? |
| GRN | असल में क्या आया, कितना ठीक निकला? |
| सप्लायर का बिल | किस चीज़ का पैसा माँगा जा रहा है? |
उदाहरण: PO में 200 hinge थे, GRN में 190 आए (10 टूटे), और बिल 200 का है। पेमेंट 190 का होगा, और बाक़ी 10 के लिए सप्लायर से credit note या बदली का माल माँगिए। Credit note के नियम: Credit Note vs Debit Note।
PO vs Quotation vs Sales Order vs Invoice
ये चारों एक ही सौदे के अलग पड़ाव हैं:
| दस्तावेज़ | कौन बनाता है | कब | खाते/GST पर असर |
|---|---|---|---|
| Quotation | सप्लायर | सौदे से पहले, रेट बताने को | कोई नहीं |
| Purchase Order | खरीदार | रेट मानकर ऑर्डर देते समय | कोई नहीं |
| Sales Order | सप्लायर | PO मिलने पर, अपनी तरफ़ से | कोई नहीं |
| Invoice | सप्लायर | माल भेजते समय | बिक्री, GST और बकाया दर्ज |
यानी खरीदार का PO, सप्लायर के लिए Sales Order बन जाता है।
PO और GST
- PO पर GST नहीं भरा जाता, और PO पर ITC नहीं मिलता। GST सप्लायर के Tax Invoice पर लगता है।
- PO में GST की दर लिखना फिर भी अच्छा है, ताकि कुल लागत और सही दर पर पहले ही सहमति हो जाए।
- सप्लायर का बिल आने पर देखिए कि उस पर आपका सही GSTIN है; नहीं तो ITC आपके GSTR-2B में नहीं दिखेगा। मिलान का तरीका: GSTR-2B Reconciliation।
आम ग़लतियाँ
- PO नंबर के बिना ऑर्डर — बाद में पता नहीं चलता कि कौन-सा बिल किस ऑर्डर का है।
- फ़ोन पर रेट बदलना, PO पर नहीं — बिल पुराने रेट से अलग आता है और झगड़ा होता है।
- आधा माल आने पर PO बंद कर देना — बाक़ी माल का हिसाब छूट जाता है।
- PO की रकम को ख़र्च मान लेना — ख़र्च और GST तब दर्ज होते हैं जब बिल आता है, PO पर नहीं।
VyapRise में Purchase Order
VyapRise में PO बनता है, open से approved होता है, प्रिंट और WhatsApp पर जाता है, और “Create Bill” दबाते ही उसी PO से purchase bill बन जाता है। PO खुद कोई खाता या स्टॉक नहीं बदलता; स्टॉक और सप्लायर का बकाया बिल से बनते हैं। Minimum stock से नीचे वाले आइटम पिछले सप्लायर के हिसाब से PO में भर जाते हैं, और माल आने पर GRN में बैच नंबर और QC स्टेटस दर्ज होता है। Purchase order, GRN और purchase bill Pro प्लान (सालाना) में हैं, और फ्री ट्रायल में खुले रहते हैं।
VyapRise में यह काम कैसे होता है
PO से बिल तक एक ही जगह
VyapRise में PO open → approved होता है, फिर 'Create Bill' से उसी PO से purchase bill बनता है; PO खुद कोई खाता या स्टॉक नहीं बदलता। PO प्रिंट और WhatsApp पर भेज सकते हैं। Purchase order, GRN और purchase bill Pro प्लान (सालाना) में हैं।
कम स्टॉक से PO
जो आइटम minimum stock से नीचे हैं, वे पिछले सप्लायर के हिसाब से ग्रुप होकर PO में भर जाते हैं (Pro)।
GRN और क्वालिटी चेक
माल आने पर GRN में गोदाम, बैच नंबर और QC स्टेटस (pending / passed / failed) दर्ज होता है, फिर बिल बनता है (Pro)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PO kya hota hai, आसान शब्दों में?
PO (Purchase Order) खरीदार का लिखित ऑर्डर है: 'मुझे यह माल, इतनी मात्रा में, इस रेट पर, इस तारीख तक चाहिए।' सप्लायर इसे मान ले तो दोनों के बीच सौदा पक्का हो जाता है।
PO कौन जारी करता है?
PO हमेशा खरीदने वाला (Buyer) जारी करता है और बेचने वाले (Supplier/Vendor) को भेजता है। सप्लायर की तरफ़ से उसी सौदे का दस्तावेज़ Sales Order कहलाता है।
क्या PO पर GST लगता है?
नहीं। PO एक ऑर्डर है, बिक्री का बिल नहीं। PO पर रेट और GST की दर लिखी जा सकती है ताकि कुल लागत साफ़ रहे, पर GST सप्लायर के Tax Invoice पर लगता है और खरीदार उसी बिल पर ITC लेता है।
PO और Invoice में क्या अंतर है?
PO खरीदार माल मँगाने के लिए माल आने से पहले भेजता है। Invoice सप्लायर माल भेजते समय पेमेंट माँगने के लिए देता है। PO से खाते में कोई एंट्री नहीं होती; Invoice से होती है।
क्या Purchase Order कानूनी अनुबंध है?
हाँ, सप्लायर के PO स्वीकार कर लेने पर यह दोनों पक्षों के बीच बाध्यकारी समझौता बन जाता है। इसलिए रेट, मात्रा, डिलीवरी और पेमेंट की शर्तें PO में साफ़ लिखिए।
क्या छोटी दुकान को भी PO बनाना चाहिए?
हर छोटी खरीद के लिए ज़रूरी नहीं। पर जहाँ रेट पहले तय होता है, माल किश्तों में आता है, या कई सप्लायर हैं, वहाँ PO से ग़लत माल, ग़लत रेट और भूले हुए ऑर्डर बहुत कम हो जाते हैं।