100% फ्री GST बिलिंग टूल
ऑनलाइन फ्री GST बिल बनाएं
GST बिल (टैक्स इनवॉइस) वह बिल है जो GST में रजिस्टर्ड विक्रेता टैक्स वाली बिक्री पर देता है: इसमें GSTIN, HSN/SAC कोड, टैक्सेबल वैल्यू और CGST + SGST या IGST लिखा होता है। नीचे का फ्री GST बिल फ़ॉर्मेट भरें और PDF डाउनलोड करें; टैक्स आपके GSTIN और सप्लाई की जगह से अपने-आप तय होता है, बिना साइन-अप।
- साइन-अप की ज़रूरत नहीं
- असीमित बिल, कोई वॉटरमार्क नहीं
- ओरिजिनल, डुप्लिकेट और ट्रिप्लिकेट कॉपी

इनवॉइस जनरेटर
फ्री, बिना साइन-अप। आपकी जानकारी सिर्फ इसी ब्राउज़र में रहती है। बिल सेव करने, स्टॉक और हिसाब रखने के लिए फ्री VyapRise अकाउंट बनाएं.बिल की PDF अंग्रेज़ी में बनती है, इसलिए नाम, पता, आइटम और नोट्स अंग्रेज़ी (A–Z) अक्षरों में भरें।
GST बिलिंग के लिए ज़रूरी हर चीज़
टैक्स के बंटवारे से PDF तक — GST टैक्स इनवॉइस पर जो कुछ होना चाहिए, ऊपर का जनरेटर वह सब संभालता है।
सप्लाई की जगह से टैक्स का बंटवारा
आपके GSTIN का स्टेट कोड और सप्लाई की जगह तय करते हैं कि CGST + SGST लगेगा या IGST, इसलिए दोनों कभी आपस में टकराते नहीं। हर लाइन पर कोई भी रेट डालें: 5%, 18%, 40% या कोई और।
हर लाइन पर HSN और SAC
HSN या SAC कोड एक बार टाइप करें। पहले बिल किए गए आइटम इसी ब्राउज़र में याद रहते हैं, इसलिए नाम दोबारा टाइप करते ही उनका HSN, रेट और GST रेट अपने-आप भर जाता है।
GSTIN फॉर्मेट की जांच
PDF बनने से पहले आपका और खरीदार का GSTIN 15 अक्षरों वाले GSTIN फॉर्मेट से जांचा जाता है, ताकि गलत टाइप हुआ नंबर बिल पर पहुंचने से पहले ही पकड़ में आ जाए।
आपका लोगो, बैंक और UPI
अपना लोगो, हस्ताक्षर, बैंक विवरण और शर्तें जोड़ें। UPI ID डालें तो बिल पर स्कैन होने वाला UPI QR कोड छपता है, जिससे ग्राहक तुरंत पेमेंट कर सके।
3 आसान चरणों में GST बिल बनाएं
किसी तकनीकी जानकारी की ज़रूरत नहीं। 2 मिनट से कम में बिलिंग शुरू करें।
- 01
अपने बिज़नेस की जानकारी डालें
साइन-अप की ज़रूरत नहीं — ऊपर दिए टूल में ही अपने बिज़नेस का नाम, पता, GSTIN, बैंक विवरण और लोगो डालें। अगली बार के लिए यह आपके ब्राउज़र में सेव रहता है।
- 02
आइटम और ग्राहक जोड़ें
ग्राहक की जानकारी डालें, HSN कोड के साथ आइटम जोड़ें, और सप्लाई के राज्य के आधार पर सारे टैक्स अपने-आप कैलकुलेट हो जाते हैं।
- 03
PDF डाउनलोड करें और भेजें
बिल को ओरिजिनल, डुप्लिकेट या ट्रिप्लिकेट कॉपी में देखें, PDF डाउनलोड या प्रिंट करें, और ग्राहक को WhatsApp पर बिल नंबर और कुल राशि भेजें।
GST बिल क्या है और टैक्स कानून में यह ज़रूरी क्यों है?
GST बिल (जिसे टैक्स इनवॉइस भी कहते हैं) एक कानूनी दस्तावेज़ है जो रजिस्टर्ड सप्लायर माल या सर्विस बेचते समय जारी करता है। खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा इसी दस्तावेज़ पर टिका होता है। GST कानून (2017) के तहत रेगुलर स्कीम में रजिस्टर्ड हर बिज़नेस के लिए सही इनवॉइस जारी करना कानूनी रूप से ज़रूरी है।
अगर आप सही GST बिल नहीं देते या गलत इनवॉइस जारी करते हैं, तो आपके बिज़नेस पर बकाया टैक्स के 100% तक या ₹10,000 (जो भी ज़्यादा हो) का सख़्त जुर्माना लग सकता है। उससे भी बड़ी बात, आपके बिज़नेस ग्राहक ITC का दावा नहीं कर पाएंगे — उनका पैसा अटकेगा और आपके व्यापारिक रिश्ते बिगड़ेंगे। VyapRise गलती वाले काम आपके हाथ से ले लेता है: टैक्स का बंटवारा, टोटल और वे फ़ील्ड जो हर बिल पर होने ही चाहिए।
Rule 46 चेकलिस्ट: वैध GST इनवॉइस पर होने वाला हर ज़रूरी फ़ील्ड
CGST Rules के Rule 46 के अनुसार हर टैक्स इनवॉइस में नीचे दिए विवरण होने चाहिए। देखें कि VyapRise इनमें से हर एक को कैसे संभालता है:
| ज़रूरी इनवॉइस फ़ील्ड | कानूनी शर्त (Rule 46) | VyapRise में कैसे |
|---|---|---|
| 1. बिज़नेस का नाम और पता | सप्लायर का कानूनी नाम और रजिस्टर्ड ऑफिस का पता। | ✓ एक बार सेव, हर बिल पर दोबारा इस्तेमाल |
| 2. सप्लायर का GSTIN | 15 अंकों-अक्षरों का गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स आइडेंटिफ़िकेशन नंबर। | ✓ सेव और फॉर्मेट की जांच |
| 3. क्रम से इनवॉइस नंबर | 16 अक्षरों तक का यूनीक नंबर या अल्फ़ान्यूमेरिक सीरियल। | ✓ अपने-आप नंबरिंग |
| 4. जारी करने की तारीख | जिस दिन इनवॉइस बना, वही तारीख। | ✓ कैलेंडर से तारीख चुनें |
| 5. खरीदार का विवरण | खरीदार का नाम, पता और GSTIN (B2B के लिए)। | ✓ सेव किए ग्राहकों की सूची |
| 6. डिलीवरी का पता | बिलिंग पते से अलग हो तो ज़रूरी। | ✓ बिलिंग और डिलीवरी, दोनों पते |
| 7. HSN या SAC कोड | माल के लिए HSN, सर्विस के लिए SAC कोड। | ✓ पहली बार के बाद हर आइटम पर याद |
| 8. टैक्सेबल वैल्यू और रेट | टैक्स से पहले की वैल्यू, डिस्काउंट की रकम और लागू टैक्स रेट। | ✓ अपने-आप हिसाब लगाने वाले फ़ील्ड |
| 9. टैक्स का बंटवारा (CGST/SGST/IGST) | राज्य के अंदर CGST+SGST, दूसरे राज्य में IGST। | ✓ स्टेट कोड से अपने-आप बंटवारा |
| 10. सप्लाई की जगह (Place of Supply) | जिस राज्य में माल या सर्विस जा रही है, उसका नाम और स्टेट कोड। | ✓ GST स्टेट कोड के साथ राज्यों की सूची |
| 11. विवरण, मात्रा और यूनिट | क्या दिया, कितना दिया और किस यूनिट में (पीस, किलो, बॉक्स…)। | ✓ हर लाइन पर, आपकी पसंद की यूनिट के साथ |
| 12. कुल वैल्यू और टैक्स की रकम | टैक्स से पहले की वैल्यू, हर टैक्स की रकम और ग्रैंड टोटल। | ✓ टोटल और शब्दों में रकम, आपके लिए तैयार |
| 13. रिवर्स चार्ज का उल्लेख | क्या टैक्स खरीदार को रिवर्स चार्ज में भरना है। | लागू हो तो नोट्स में लिखें — दुकान की बिक्री में ऐसा कम ही होता है |
| 14. हस्ताक्षर | सप्लायर या अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल सिग्नेचर। | ✓ हस्ताक्षर एक बार अपलोड करें; हर बिल पर छपता है |
| 15. IRN वाला QR कोड | सिर्फ़ ₹5 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस के लिए, IRP पर ई-इनवॉइस के बाद। | सरकारी पोर्टल पर बनता है; पेमेंट का UPI QR इससे अलग है |
भारत में GST स्लैब और HSN कोड की शर्तें
22 सितंबर 2025 से GST की दो मुख्य दरें हैं, 5% और 18%, और कुछ चुनिंदा सामानों पर 40%; 12% और 28% के स्लैब हटा दिए गए, और सोने पर 3% जैसी विशेष दरें जारी हैं। 57वीं GST काउंसिल बैठक (8 अक्टूबर 2026) में दरें नहीं बदलीं। देखें कौन-सी चीज़ किस स्लैब में गई। दरें और कोड की शर्तें समझ लेने से वर्गीकरण (classification) के विवाद नहीं होते। HSN कोड की मौजूदा शर्तें:
- ₹5 करोड़ तक टर्नओवर — B2B बिलों पर कम से कम 4 अंकों का HSN कोड ज़रूरी। B2C में वैकल्पिक।
- ₹5 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर — सभी B2B और B2C बिलों पर 6 अंकों का HSN कोड ज़रूरी।
- एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट — 8 अंकों का HSN कोड ज़रूरी।
| GST स्लैब | आम तौर पर कौन-सा सामान और सर्विस | कौन-सा टैक्स लगता है |
|---|---|---|
| छूट / 0% | ताज़ी सब्ज़ियां, खुला दूध और अनाज, UHT दूध, पैकेज्ड पनीर, रोटी और पराठा, व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा। | कोई टैक्स नहीं |
| 5% GST (मेरिट) | साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, घी, मक्खन, पैकेज्ड नमकीन, चॉकलेट, साइकिल, ट्रैक्टर, ज़्यादातर दवाइयां। | CGST + SGST (2.5% + 2.5%) या IGST (5%) |
| 18% GST (स्टैंडर्ड) | ज़्यादातर सामान और सर्विस: सीमेंट, AC, सभी TV, छोटी कारें, 350cc तक की मोटरसाइकिल, सॉफ्टवेयर, कंसल्टिंग। | CGST + SGST (9% + 9%) या IGST (18%) |
| 40% GST (डी-मेरिट) | मीठे गैस वाले और कैफ़ीन वाले ड्रिंक, बड़ी कारें, 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिल, याट, सट्टेबाज़ी और ऑनलाइन मनी गेमिंग। | CGST + SGST (20% + 20%) या IGST (40%) |
B2B और B2C इनवॉइस: मुख्य अंतर
आप किसी दूसरे बिज़नेस (B2B) को बेच रहे हैं या आख़िरी ग्राहक (B2C) को, इससे बिलिंग का तरीका काफ़ी बदल जाता है:
- B2B इनवॉइस: ग्राहक का GSTIN ज़रूरी है। खरीदार GSTR-1 में अपलोड हुए इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेगा। सही HSN कोड ज़रूरी है।
- B2C इनवॉइस: ग्राहक का GSTIN ज़रूरी नहीं। ग्राहक का नाम और पता तभी ज़रूरी है जब बिल ₹50,000 या उससे ज़्यादा का हो। GSTR-1 में ये बिल जोड़कर (सारांश में) दिखाए जाते हैं; सिर्फ़ ₹1 लाख से ज़्यादा के अंतर-राज्यीय बिल (B2C Large) एक-एक करके दिखते हैं।
GST बिल कैसे बनाएं: स्टेप-बाय-स्टेप, एक उदाहरण के साथ
बिल हाथ से लिखें, स्प्रेडशीट में बनाएं या ऊपर के जनरेटर में — आठों स्टेप वही रहते हैं।
- देखें कि कौन-सा दस्तावेज़ चाहिए। रजिस्टर्ड रेगुलर डीलर टैक्स इनवॉइस जारी करता है। कंपोज़िशन डीलर, या छूट वाला (exempt) सामान बेचने वाला, इसकी जगह बिल ऑफ़ सप्लाई देता है और GST नहीं लेता। ₹200 से कम की बिक्री पर, अगर ग्राहक (अनरजिस्टर्ड) बिल न मांगे, तो आप उस वक़्त बिल छोड़कर दिन के आख़िर में एक कंसॉलिडेटेड इनवॉइस बना सकते हैं (Section 31(3)(b))।
- नंबर और तारीख दें। नंबर 16 अक्षरों तक का हो सकता है (अक्षर, अंक,
-और/), क्रम से चलता है और एक वित्त वर्ष में दोहराया नहीं जा सकता (Rule 46(b))। माल के लिए बिल डिलीवरी के समय या उससे पहले दें; सर्विस के लिए सप्लाई के 30 दिन के अंदर (Rule 47)। - खरीदार जोड़ें। रजिस्टर्ड खरीदार का नाम, पता और 15 अंकों-अक्षरों का GSTIN: GSTIN के बिना खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकता। अनरजिस्टर्ड खरीदार का नाम, पता और राज्य तभी ज़रूरी है जब बिल ₹50,000 या उससे ज़्यादा का हो।
- हर आइटम अलग लाइन पर लिखें। विवरण, HSN कोड (सर्विस के लिए SAC), मात्रा, यूनिट, रेट और कोई डिस्काउंट हो तो वह। बिल पर दिखाया गया डिस्काउंट टैक्सेबल वैल्यू घटाता है (Section 15(3)(a)); बाद में तय हुआ डिस्काउंट इस तरह नहीं घटता।
- सप्लाई की जगह से तय करें: CGST + SGST या IGST। सप्लाई की जगह आपके अपने राज्य में है तो रेट को आधा-आधा बांटें: CGST और SGST। दूसरे राज्य में है तो पूरा रेट IGST के रूप में लगाएं। माल के लिए सप्लाई की जगह वह है जहाँ डिलीवरी पूरी होती है, खरीदार का बिलिंग पता नहीं।
- टैक्स और टोटल निकालें। टैक्सेबल वैल्यू = मात्रा × रेट − डिस्काउंट। टैक्स = टैक्सेबल वैल्यू × रेट, CGST, SGST या IGST के लिए अलग-अलग दिखाया गया। हर टैक्स की रकम को नज़दीकी रुपये तक राउंड करें (Section 170) और ग्रैंड टोटल अंकों और शब्दों, दोनों में लिखें।
- हस्ताक्षर करें और कॉपियां बनाएं। सप्लायर या अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल सिग्नेचर। माल के लिए तीन कॉपी: Original for Recipient (खरीदार के लिए), Duplicate for Transporter (ट्रांसपोर्टर के लिए), Triplicate for Supplier (आपके रिकॉर्ड के लिए)। सर्विस के लिए दो: Original और Duplicate (Rule 48)।
- रिटर्न में दिखाएं। B2B बिल GSTR-1 में एक-एक करके जाते हैं; B2C बिल जोड़कर दिखाए जाते हैं, सिवाय ₹1 लाख से ज़्यादा के अंतर-राज्यीय बिलों के। अगर 2017-18 से किसी भी साल आपका कुल टर्नओवर (aggregate turnover) ₹5 करोड़ पार कर चुका है, तो B2B बिल के वैध होने से पहले ई-इनवॉइस पोर्टल से उसका IRN लेना भी ज़रूरी है।
उदाहरण: एक ही बिल, राज्य के अंदर और दूसरे राज्य में
अहमदाबाद की एक फ़र्नीचर दुकान 2 स्टील अलमारी (HSN 9403) ₹9,000 प्रति नग पर, 5% डिस्काउंट के साथ, 18% GST पर बेचती है।
| लाइन | खरीदार गुजरात में | खरीदार महाराष्ट्र में |
|---|---|---|
| 2 × ₹9,000 | ₹18,000 | ₹18,000 |
| डिस्काउंट 5% | − ₹900 | − ₹900 |
| टैक्सेबल वैल्यू | ₹17,100 | ₹17,100 |
| CGST 9% | ₹1,539 | — |
| SGST 9% | ₹1,539 | — |
| IGST 18% | — | ₹3,078 |
| बिल का कुल | ₹20,178 | ₹20,178 |
ग्राहक दोनों हालात में उतनी ही रकम देता है; बदलता सिर्फ़ यह है कि टैक्स किस सरकार को जाता है — इसीलिए बिल पर बंटवारा सही होना ज़रूरी है।
वे गलतियां जिनसे GST बिल अमान्य हो जाता है
- B2B बिल पर GSTIN नहीं। खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट चला जाता है और वह बिल वापस भेज देगा।
- खरीदार का ऑफिस दूसरे राज्य में है, इसलिए IGST लगा दिया, जबकि माल आपके ही राज्य में डिलीवर हुआ। फ़ैसला सप्लाई की जगह से होता है, बिलिंग पते से नहीं।
- "रेट + GST" एक ही रकम में। टैक्सेबल वैल्यू, रेट और टैक्स की रकम, तीनों अलग दिखने चाहिए; CGST और SGST अलग-अलग लाइन पर।
- MRP के ऊपर GST जोड़ना। MRP में GST पहले से शामिल होता है; उस पर फिर से GST लेना ज़्यादा वसूली है।
- एक ही वित्त वर्ष में इनवॉइस नंबर दोहराना, या साल के बीच में नई सीरीज़ शुरू करके GSTR-1 में विभाग को न बताना।
- कंपोज़िशन डीलर का टैक्स इनवॉइस। कंपोज़िशन डीलर GST नहीं वसूल सकते; बिल पर "Bill of Supply" लिखा होना चाहिए और कंपोज़िशन की घोषणा भी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
ऑनलाइन फ्री GST बिल कैसे बनाएं?
इस पेज पर दिए GST बिल जनरेटर का इस्तेमाल करें — कोई साइन-अप नहीं। अपने बिज़नेस का नाम, GSTIN और बैंक विवरण डालें, फिर ग्राहक और HSN/SAC कोड के साथ आइटम जोड़ें। सप्लाई की जगह (place of supply) के हिसाब से CGST, SGST और IGST अपने-आप लगते हैं, और PDF तुरंत डाउनलोड हो जाता है। फ्री VyapRise अकाउंट तभी बनाएं जब आप चाहते हों कि आपके बिल सेव रहें और हर डिवाइस पर खोजे जा सकें।
GST बिल का फ़ॉर्मेट क्या है, उसमें कौन-कौन सी जानकारी ज़रूरी है?
सही GST बिल में ये होना चाहिए: सप्लायर का GSTIN, इनवॉइस नंबर और तारीख, खरीदार का विवरण, हर आइटम का HSN/SAC कोड, टैक्सेबल वैल्यू, CGST/SGST या IGST की दर और रकम, कुल रकम और सप्लाई की जगह। जनरेटर आपके बिज़नेस का विवरण और पहले बिल किया हर आइटम याद रखता है, इसलिए नए बिल में ज़्यादातर सिर्फ़ ग्राहक और आइटम जोड़ने होते हैं।
GST बिल पर CGST और SGST की जगह IGST कब लगता है?
IGST (Integrated GST) दूसरे राज्य में बिक्री (inter-state) पर लगता है, यानी जब सप्लायर का राज्य और सप्लाई की जगह (खरीदार का राज्य) अलग हों। CGST (Central GST) और SGST (State GST) राज्य के अंदर की बिक्री (intra-state) पर लगते हैं, यानी जब सप्लायर और खरीदार दोनों एक ही राज्य में हों।
क्या VyapRise GST बिलिंग सॉफ्टवेयर फ्री है?
इस पेज का GST बिल मेकर फ्री है और साइन-अप नहीं मांगता। VyapRise ऐप का Free प्लान एक यूज़र (मालिक) के लिए हमेशा फ्री है — हर कंपनी के लिए महीने में 10 सेल्स इनवॉइस, 30 आइटम और 10 ग्राहक तक। Pro, ₹1,499 प्रति वर्ष में, अनलिमिटेड इनवॉइस, परचेज़ बिल, स्टाफ यूज़र, कोटेशन और चालान, पूरी अकाउंटिंग और GST रिपोर्ट्स देता है, और हर नई कंपनी Pro 7 दिन फ्री आज़मा सकती है। साइन-अप के लिए कार्ड की ज़रूरत नहीं।
क्या मोबाइल पर GST बिल बना सकते हैं?
हाँ, VyapRise क्लाउड पर चलता है और किसी भी डिवाइस — डेस्कटॉप, टैबलेट या मोबाइल — के ब्राउज़र में खुलता है। चलते-फिरते GST बिल बनाएं और ग्राहकों को भेजें।
क्या VyapRise ई-इनवॉइस (IRN) और ई-वे बिल बना सकता है?
नहीं — VyapRise IRN या ई-वे बिल नंबर नहीं बनाता; दोनों सरकारी पोर्टल (einvoice1.gst.gov.in और ewaybillgst.gov.in) पर बनते हैं। हाँ, जो चीज़ें ये पोर्टल जांचते हैं, वे VyapRise पहले से सही रखता है: खरीदार का GSTIN सेव करते समय जांचा जाता है, हर लाइन पर HSN/SAC कोड होता है, और CGST + SGST या IGST सप्लाई की जगह के हिसाब से लगता है।
बिना सॉफ्टवेयर GST बिल कैसे बनाएं?
काग़ज़ पर या स्प्रेडशीट में भी बिल में यही सब चाहिए: आपका नाम, पता और GSTIN; सीरियल नंबर और तारीख; खरीदार का नाम, पता और GSTIN; हर आइटम उसके HSN या SAC कोड, मात्रा, यूनिट, रेट और डिस्काउंट के साथ; टैक्सेबल वैल्यू; CGST और SGST (एक ही राज्य) या IGST (दूसरा राज्य) अलग-अलग; कुल रकम अंकों और शब्दों में; और हस्ताक्षर। इस पेज का स्टेप-बाय-स्टेप हिस्सा एक उदाहरण के साथ पूरा तरीका समझाता है। ऊपर का फ्री जनरेटर हिसाब और लेआउट दोनों खुद कर देता है, और साइन-अप नहीं मांगता।
GST बिल कितने दिनों के अंदर जारी करना ज़रूरी है?
माल (goods) के लिए टैक्स इनवॉइस माल भेजने या डिलीवरी के समय या उससे पहले जारी होता है। सर्विस के लिए सप्लाई के 30 दिन के अंदर (बैंक, NBFC और बीमा कंपनियों के लिए 45 दिन)। किसी अनरजिस्टर्ड ग्राहक को ₹200 से कम की बिक्री, जब वह बिल न मांगे, दिन के आख़िर में एक कंसॉलिडेटेड इनवॉइस से कवर की जा सकती है।
गलत GST इनवॉइस जारी करने पर कितना जुर्माना है?
गलत इनवॉइस जारी करने या इनवॉइस न देने पर CGST Act की Section 122 के तहत जुर्माना लग सकता है: ₹10,000 या टैक्स चोरी की रकम, जो भी ज़्यादा हो। VyapRise जैसे तय टेम्पलेट वाले सिस्टम से बिल बनाने पर ऐसी कंप्लायंस की गलतियों से बचाव होता है।
ब्लैंक GST टैक्स इनवॉइस फॉर्मेट डाउनलोड करें
Rule 46 के सभी ज़रूरी फ़ील्ड के साथ तैयार — GSTIN, HSN/SAC, टैक्सेबल वैल्यू, CGST/SGST/IGST का बंटवारा और सप्लाई की जगह।
डाउनलोड और उपयोग करने के लिए 100% फ्री, कोई साइन-अप नहीं। हाथ से भरने के बजाय ऊपर दिए गए टूल से 1 मिनट में PDF बनाएं।
इस विषय पर गाइड
आसान हिंदी में पूरी जानकारी।
- New GST Slab 2026: 5%, 18%, 40% की पूरी GST Rate List2026 में GST के मुख्य स्लैब 5% और 18% हैं, और कुछ चुनिंदा luxury व de-merit चीज़ों पर 40%। ये 22 सितंबर 2025 से लागू हैं, जब 12% और 28% के स्लैब हटाए गए। सोने-चाँदी पर 3% और कच्चे हीरों पर 0.25% जैसी विशेष दरें जारी हैं। PIB रिलीज़ के अनुसार 57th GST Council meeting में स्लैब नहीं बदले।
- 57th GST Council Meeting: 8 अक्टूबर 2026 के बड़े फैसले8 अक्टूबर 2026 को हुई 57th GST Council meeting में GST स्लैब नहीं बदले; सिर्फ़ कुछ स्पष्टीकरण और चुनिंदा रेट बदलावों की सिफ़ारिश हुई। फ़ोकस प्रक्रिया पर रहा: ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए महीने के अंदर देर से भरे रिटर्न पर लेट फीस माफ़ी, ₹10,000 से कम टैक्स पर नोटिस नहीं, जनरल पेनल्टी ₹25,000 से घटाकर ₹10,000, गिरफ़्तारी का प्रावधान (धारा 69) हटाना, प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करना, और free samples, insurance जैसी चीज़ों पर ITC खोलना। ये सिफ़ारिशें हैं — नोटिफ़िकेशन या कानून में बदलाव के बाद ही लागू होंगी।
- GST Invoice Rules 2026: नियम, Format और बनाने का तरीकाGST Invoice (Tax Invoice) वह कानूनी दस्तावेज़ है जो रजिस्टर्ड व्यापारी टैक्सेबल बिक्री पर जारी करता है। CGST Rule 46 के अनुसार इसमें विक्रेता और (B2B में) ख़रीदार का GSTIN, अधिकतम 16 अक्षर का लगातार इनवॉइस नंबर, तारीख, टर्नओवर के हिसाब से 4 या 6 अंकों का HSN, टैक्सेबल वैल्यू, टैक्स की दर और रकम, प्लेस ऑफ सप्लाई और हस्ताक्षर होने ज़रूरी हैं।
- GST Bill Kaise Banaye? जीएसटी बिल बनाने के 8 स्टेप और उदाहरणGST बिल बनाने के लिए अपना नाम, पता और GSTIN, लगातार बिल नंबर और तारीख, ग्राहक की जानकारी, और हर आइटम का HSN, मात्रा, रेट व टैक्सेबल वैल्यू लिखें। फिर अपने राज्य में बिक्री पर CGST + SGST और दूसरे राज्य में IGST लगाएँ, और कुल रकम व हस्ताक्षर के साथ बिल पूरा करें।
- IRN Number क्या है? E-Invoice कब बनता है, IRN कैसे मिलता हैIRN (Invoice Reference Number) वह 64 अक्षर का यूनीक नंबर है जो सरकार का Invoice Registration Portal (IRP) बिल रजिस्टर होने पर देता है, साथ में डिजिटल साइन्ड QR कोड। E-Invoice उन कारोबारियों पर लागू है जिनका टर्नओवर 2017-18 से अब तक किसी भी वित्तीय वर्ष में 5 करोड़ रुपये से ज़्यादा रहा हो।
- Invoice Kya Hota Hai? मतलब, Tax Invoice, प्रकार और उदाहरणइनवॉइस (बिल) वह दस्तावेज़ है जो विक्रेता माल या सेवा बेचने पर खरीदार को देता है; यह बिक्री का सबूत और पेमेंट की माँग दोनों है। GST में रजिस्टर्ड व्यापारी टैक्स वसूलने पर Tax Invoice और टैक्स न वसूल पाने पर (कम्पोजिशन या छूट वाला माल) Bill of Supply जारी करता है।
अपने सारे GST बिल एक फ्री अकाउंट में रखें
ऊपर दिया जनरेटर एक बार में एक बिल बनाता है। फ्री VyapRise अकाउंट में हर बिल सेव रहता है, 10 ग्राहक और 30 आइटम तक, साथ में एक गोदाम की इन्वेंटरी और इस महीने का पार्टी लेजर भी। रसीदें, पूरी अकाउंटिंग और GST रिपोर्ट्स Pro में हैं, जिसे आप 7 दिन फ्री आज़मा सकते हैं।
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