Taxation
57th GST Council Meeting: 8 अक्टूबर 2026 के बड़े फैसले
GST स्लैब नहीं बदले, पर लेट फीस माफ़ी, ₹10,000 से कम पर नोटिस नहीं, कम पेनल्टी, गिरफ़्तारी का प्रावधान हटाने और ITC बढ़ाने की सिफ़ारिश हुई। छोटे व्यापारी पर असर।
संक्षेप में
8 अक्टूबर 2026 को हुई 57th GST Council meeting में GST स्लैब नहीं बदले; सिर्फ़ कुछ स्पष्टीकरण और चुनिंदा रेट बदलावों की सिफ़ारिश हुई। फ़ोकस प्रक्रिया पर रहा: ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए महीने के अंदर देर से भरे रिटर्न पर लेट फीस माफ़ी, ₹10,000 से कम टैक्स पर नोटिस नहीं, जनरल पेनल्टी ₹25,000 से घटाकर ₹10,000, गिरफ़्तारी का प्रावधान (धारा 69) हटाना, प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करना, और free samples, insurance जैसी चीज़ों पर ITC खोलना। ये सिफ़ारिशें हैं — नोटिफ़िकेशन या कानून में बदलाव के बाद ही लागू होंगी।
- 57th meeting में GST स्लैब नहीं बदले, सिर्फ़ कुछ स्पष्टीकरण और चुनिंदा रेट बदलावों की सिफ़ारिश हुई; रेट से जुड़े मामले अब साल में एक बार अलग बैठक में देखे जाएँगे।
- पिछले साल ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले करदाता अगर रिटर्न उसी महीने के अंत तक भर दें जिसमें वह देय था, तो लेट फीस माफ़ करने की सिफ़ारिश है।
- ₹10,000 से कम टैक्स (CGST + SGST + IGST + Cess मिलाकर) पर show cause notice जारी नहीं होगा; पुराने लंबित मामलों पर भी यही सीमा लागू होगी।
- धारा 69 (गिरफ़्तारी) हटाने, प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने और धारा 125 की अधिकतम पेनल्टी ₹25,000 से ₹10,000 करने की सिफ़ारिश।
- PIB के अनुसार ये फ़ैसले सिफ़ारिशें हैं; कानून की ताक़त सिर्फ़ उनसे जुड़े नोटिफ़िकेशन, सर्कुलर या संशोधन से आएगी। कुछ की तारीख़ें तय हैं: 1 नवंबर 2026 और 1 अप्रैल 2027।
8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST Council की 57वीं बैठक हुई। पिछले साल की 56th meeting रेट घटाने के बारे में थी; इस बार का फ़ोकस प्रक्रिया पर रहा — रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफ़ंड, नोटिस और पेनल्टी।
इस लेख में हर बड़ा फ़ैसला आसान भाषा में है, और सबसे ज़रूरी बात भी: कौन सा फ़ैसला कब से लागू होगा। सारी जानकारी PIB की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ (Release ID 2320934, 8 अक्टूबर 2026) से ली गई है।
ध्यान दें: PIB के अनुसार ये Council की सिफ़ारिशें हैं। कानून की ताक़त सिर्फ़ उनसे जुड़े नोटिफ़िकेशन, सर्कुलर या CGST Act के संशोधन से आएगी। जब तक वे जारी नहीं होते, मौजूदा नियम ही लागू हैं। नीचे लिखी सीमाएँ, धाराएँ और तारीख़ें PIB रिलीज़ में बताई गई सिफ़ारिशें हैं — अपने मामले में लागू करने से पहले आधिकारिक नोटिफ़िकेशन देखें या अपने CA से पुष्टि करें।
सबसे पहले: GST स्लैब नहीं बदले
57th meeting में GST स्लैब नहीं बदले। आज भी वही ढाँचा है जो 22 सितंबर 2025 से लागू है: ज़्यादातर सामान और सेवाएँ 5% या 18% पर, और कुछ चुनिंदा चीज़ें 40% पर। (पूरी जानकारी: GST Rates 2026: 5%, 18% और 40% स्लैब)
कुछ स्पष्टीकरण और चुनिंदा रेट बदलावों की सिफ़ारिश ज़रूर हुई:
- ईसबगोल (Psyllium seeds) पर NIL GST, चाहे ताज़ा, ठंडा, फ्रोज़न या सूखा हो।
- खिलौने: रेट शेड्यूल की खिलौनों वाली एंट्री सिर्फ़ tricycle, scooter, pedal car तक सीमित नहीं — heading 9503 के सभी खिलौने (गुड़िया, पज़ल आदि) उसमें आते हैं।
- Re-treaded tractor tyres का रेट नए tractor tyres के बराबर किया जाएगा।
- कबाड़ (waste & scrap): प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक, टायर का स्क्रैप और used cooking oil, unregistered व्यक्ति से registered व्यक्ति को बिकने पर RCM में; registered से registered (B2B) पर 2% TDS।
- सेकंड-हैंड गाड़ियों के डीलर (margin scheme) स्पेयर, रिपेयर, किराया, विज्ञापन जैसी चीज़ों पर ITC ले सकते हैं — रोक सिर्फ़ ख़रीदी गई पुरानी गाड़ी के टैक्स पर है।
- Electric vehicle से passenger transport या ड्राइवर के साथ किराये पर गाड़ी: 5% (सीमित ITC) का विकल्प, अगर बैटरी चार्जिंग का ख़र्च किराये में शामिल हो।
- E-commerce से जुड़ी डिलीवरी सेवाएँ: 5% बिना ITC।
रेट से जुड़े मामले अब साल में एक बार अलग बैठक में देखे जाएँगे।
छोटे व्यापारी के लिए 5 सबसे काम के फ़ैसले
1. लेट फीस माफ़ी (₹5 करोड़ तक टर्नओवर)
जिन करदाताओं का पिछले वित्तीय वर्ष का टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है, वे अगर धारा 39(1) का रिटर्न (जैसे GSTR-3B) उसी महीने के अंत तक भर दें जिसमें वह देय था, तो उस देरी पर लेट फीस नहीं लगेगी।
उदाहरण: सितंबर का GSTR-3B 20 अक्टूबर को देय है। आपने 28 अक्टूबर को भरा — सिफ़ारिश लागू होने के बाद इस पर लेट फीस नहीं लगेगी। 3 नवंबर को भरा, तो लगेगी।
ब्याज (interest) पर इसका असर नहीं है — देर से जमा टैक्स पर ब्याज लगता रहेगा।
2. ₹10,000 से कम पर नोटिस नहीं
धारा 73, 74 और 74A में संशोधन करके ₹10,000 से कम टैक्स (CGST + SGST + IGST + Cess मिलाकर) पर show cause notice जारी नहीं होगा। जो नोटिस और अपील इस सीमा से कम के हैं और प्रावधान लागू होने के दिन लंबित हैं, उन्हें भी ऐसे निपटाया जाएगा मानो सीमा पहले से लागू थी।
3. कम पेनल्टी
| बदलाव | पहले | सिफ़ारिश |
|---|---|---|
| धारा 125 की अधिकतम जनरल पेनल्टी | ₹25,000 | ₹10,000 |
| Non-fraud मामलों में न्यूनतम पेनल्टी | ₹10,000 | हटेगी |
| Non-fraud मामला: टैक्स + ब्याज आदेश के 30 दिन (धारा 73) या 60 दिन (धारा 74A) में जमा | — | सिर्फ़ 5% पेनल्टी |
| सिर्फ़ पेनल्टी वाले आदेश पर अपील का pre-deposit | असीमित | अधिकतम ₹40 करोड़ (₹20 करोड़ CGST + ₹20 करोड़ SGST) |
4. गिरफ़्तारी और प्रॉसिक्यूशन
- धारा 69 पूरी तरह हटाने की सिफ़ारिश — यानी GST में गिरफ़्तारी का अधिकार ख़त्म।
- प्रॉसिक्यूशन (आपराधिक मुक़दमा) की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफ़ारिश। अभी कौन-सी सीमा किस अपराध पर लागू है, इसकी पूरी जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफ़िकेशन देखें या अपने CA से पुष्टि करें।
- धारा 132 के कुछ अपराध हटेंगे या सीमित होंगे; ITC से जुड़ा अपराध सिर्फ़ उस फ़र्ज़ी ITC तक रहेगा जो बिना माल/सेवा या बिना बिल के लिया गया हो।
ईमानदार व्यापारी के लिए संदेश साफ़ है: छोटी गलतियों को अपराध की तरह नहीं देखा जाएगा। फ़र्ज़ी बिलिंग पर सख़्ती बनी रहेगी।
5. रास्ते में माल रोकने के नियम (E-way bill)
धारा 68, 129 और 130 में संशोधन की सिफ़ारिश:
- गाड़ी सिर्फ़ ठोस ख़ुफ़िया जानकारी पर, और Joint Commissioner या उससे ऊपर के अधिकारी की अनुमति से रोकी जा सकेगी।
- जाँच और ज़ब्ती सिर्फ़ उस राज्य में, जहाँ सप्लायर या ख़रीदार हो। बीच के (transit) राज्यों में रोक-टोक नहीं।
- लेकिन अगर e-way bill नहीं बना या गाड़ी में माल का स्रोत/गंतव्य बताने वाला कोई कागज़ नहीं, तो किसी भी राज्य में जाँच हो सकती है।
- रास्ते में चल रहे माल या गाड़ी पर धारा 130 की ज़ब्ती (confiscation) लागू नहीं होगी।
यानी e-way bill और delivery challan साथ रखना अब और भी ज़रूरी है — वही आपको बीच के राज्यों की जाँच से बचाएगा।
ITC (Input Tax Credit) से जुड़े फ़ैसले
धारा 17(5) की रोक हटेगी
इन चीज़ों पर अभी ITC नहीं मिलता; Council ने रोक हटाने की सिफ़ारिश की है:
- Free samples
- Outdoor catering
- Health और life insurance
- कारख़ाने के बाहर बिछी पाइपलाइन और टेलीकॉम टावर
- क़ानून के अनुसार shelf life ख़त्म होने पर नष्ट या write-off किया गया सामान
दुकानदार के लिए आख़िरी पॉइंट बड़ा है: एक्सपायरी वाला माल (दवा, पैक्ड फ़ूड) नष्ट करने पर अब तक ITC रिवर्स करना पड़ता था। संशोधन लागू होने तक मौजूदा नियम ही मानें — free samples पर अभी का नियम यहाँ पढ़ें।
Same line of business में ITC
रेस्टोरेंट/आउटडोर कैटरिंग, ₹7,500 प्रति यूनिट प्रति दिन तक के होटल कमरे, और जिम/फ़िटनेस सेवाओं पर उसी लाइन के व्यापार के लिए सीमित ITC — जैसे अभी passenger transport, tour operator और गाड़ी किराये पर मिलता है।
Refund में ITC
- Inverted duty structure (इनपुट पर टैक्स ज़्यादा, बिक्री पर कम) के refund में अब input services का ITC भी — 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर।
- Capital goods का ITC zero-rated और inverted duty refund में — 60 महीनों में बँटकर, 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर।
रजिस्ट्रेशन आसान होगा
- बदलाव (amendment) अपने-आप मंज़ूर: Principal Place of Business को छोड़कर रजिस्ट्रेशन की सभी जानकारी का बदलाव पोर्टल पर अपने-आप स्वीकार होगा। Rule 14A (ऑटोमैटिक रूट) वालों के लिए PPoB भी।
- रजिस्ट्रेशन कैंसिल करना: सारे रिटर्न भरे और बकाया चुकाए होने पर, कैंसिलेशन की अर्ज़ी (REG-16) सिस्टम अपने-आप मंज़ूर करेगा — पहले चरण में उन मामलों में जहाँ किसी महीने ₹2.5 लाख से ज़्यादा ITC आगे नहीं दिया गया, बाद में सभी मामलों में।
- नया रजिस्ट्रेशन: ज़रूरी दस्तावेज़ों की साफ़ सूची वाला सर्कुलर, REG-01 में dropdown, और आसान पोर्टल — ताकि बेवजह के सवाल और rejection कम हों।
- E-commerce पर बेचने वाले छोटे सेलर (Rule 14B): जिस राज्य में आपकी दुकान/गोदाम नहीं, वहाँ Amazon-Flipkart जैसे ECO के गोदाम को Principal Place of Business बताकर रजिस्ट्रेशन — अगर हर महीने ₹2.5 लाख से ज़्यादा ITC आगे नहीं देते। रजिस्ट्रेशन सिस्टम अपने-आप देगा।
रिटर्न: अप्रैल 2027 से नया तरीका
GSTR-1 और GSTR-3B के बीच, और GSTR-2B और GSTR-3B के ITC के बीच के अंतर से सबसे ज़्यादा नोटिस आते हैं। इसके लिए:
- GSTR-1/1A/IFF में बदलाव ताकि उन्हें GSTR-3B से मिलाना आसान हो।
- IMS (Invoice Management System) को नियम में जगह (Rule 60(6A)): ख़रीद के बिल को accept, reject या pending रखना, जिससे GSTR-2B बनता है।
- RCM और ITC reversal/reclaim के लिए पोर्टल पर नए statements (Rule 86C, 86D)।
- GSTR-3B में liability और ITC सुधारने का तरीका (Rule 61(1A), 61(1B))।
यह अप्रैल 2027 के रिटर्न से लागू करने की सिफ़ारिश है, और पहले जनता से राय (consultation) ली जाएगी।
रिफ़ंड जल्दी
- इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर के अतिरिक्त बैलेंस का पूरा refund सिस्टम अपने-आप देगा।
- Acknowledgement या deficiency memo की समय-सीमा 15 से घटकर 10 दिन; 10 दिन में न आए तो acknowledgement माना जाएगा।
- Zero-rated और inverted duty refund का 90% provisional refund सिस्टम अपने-आप।
- ₹1,000 की न्यूनतम refund सीमा CGST, SGST और IGST मिलाकर गिनी जाएगी।
ARQP: छोटे B2C व्यापारियों के लिए नई स्कीम (सैद्धांतिक मंज़ूरी)
Council ने Annual Return Quarterly Payment (ARQP) — एक वैकल्पिक स्कीम — के concept note को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी है। यह उनके लिए होगी:
- पिछले वर्ष का टर्नओवर ₹5 करोड़ तक, और
- सिर्फ़ unregistered ग्राहकों को (B2C) बिक्री — जैसे किराना, मेडिकल, रिटेल दुकानें।
नाम के अनुसार इसमें रिटर्न साल में एक बार और टैक्स तिमाही में भरा जाएगा। अभी यह सिर्फ़ concept है; विस्तृत नियम और तारीख़ बाद में आएँगी।
कौन सा फ़ैसला कब से
| फ़ैसला | कब से |
|---|---|
| Inverted duty refund में input services का ITC | 1 नवंबर 2026 या बाद में लिया गया ITC |
| Capital goods ITC का refund (60 महीने में) | 1 अप्रैल 2027 या बाद में लिया गया ITC |
| रिटर्न में liability/ITC सुधारने का नया तरीका | अप्रैल 2027 का रिटर्न (consultation के बाद) |
| लेट फीस माफ़ी, ₹10,000 नोटिस सीमा, पेनल्टी, गिरफ़्तारी, प्रॉसिक्यूशन, ITC (17(5)) | CGST Act/Rules में संशोधन या नोटिफ़िकेशन के बाद |
| ARQP | सिर्फ़ सैद्धांतिक मंज़ूरी, नियम आने बाकी |
अभी आपको क्या करना चाहिए
- कुछ भी न बदलें जब तक नोटिफ़िकेशन न आए। लेट फीस, ITC रिवर्सल, पेनल्टी — अभी पुराने नियम ही लागू हैं।
- रिटर्न समय पर भरें। लेट फीस माफ़ी मिलने के बाद भी वह उसी महीने के अंत तक की देरी पर ही है, और ब्याज लगता रहेगा।
- ख़रीद के बिल हर महीने GSTR-2B से मिलाएँ। अप्रैल 2027 का नया तरीका इसी मिलान को सख़्त बनाएगा।
- माल के साथ e-way bill और कागज़ रखें। नई छूट सिर्फ़ उन्हीं को मिलेगी जिनके कागज़ पूरे हैं।
- बिक्री और ख़रीद का हिसाब एक जगह रखें, ताकि GSTR-1 और GSTR-3B में अंतर ही न आए।
VyapRise कैसे मदद करता है
VyapRise में हर बिक्री बिल पर HSN, GST रेट और CGST+SGST या IGST का बँटवारा अपने-आप होता है, और Pro प्लान में ख़रीद बिल पर GST इनपुट दर्ज होता है। Pro प्लान में GSTR-1 और GSTR-3B की रिपोर्ट (PDF/CSV) उन्हीं बिलों से बनती है, इसलिए दोनों में वही आँकड़े आते हैं जो आपके बिल में हैं। GSTR-2B reconciliation में पोर्टल से डाउनलोड की गई 2B JSON फ़ाइल अपलोड करें, और VyapRise बताता है कि कौन सा ख़रीद बिल मिलता है, कौन सा 2B में नहीं है और किसमें अंतर है — ठीक वही मिलान जिसे अप्रैल 2027 का नया तरीका सख़्त बनाएगा।
VyapRise रिटर्न फ़ाइल नहीं करता, और ई-इनवॉइस (IRN) व e-way bill नंबर भी नहीं बनाता — ये सरकारी पोर्टल पर ही होते हैं (Pro प्लान पर e-way bill पोर्टल के bulk upload के लिए JSON फ़ाइल तैयार होती है)। VyapRise उनके लिए ज़रूरी जानकारी — सही GSTIN, HSN और टैक्स — पहले से सही रखता है।
स्रोत: PIB, “Recommendations of the 57th Meeting of the GST Council”, 8 अक्टूबर 2026 (Release ID 2320934)। यह लेख जानकारी के लिए है; अपने मामले में CA से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 57th GST Council meeting में GST रेट बदले गए?
स्लैब नहीं बदले। रेट का बड़ा बदलाव 56th meeting (सितंबर 2025) में हुआ था, जब 12% और 28% के स्लैब हटाकर ज़्यादातर सामान 5% और 18% में आ गए और 22 सितंबर 2025 से लागू हुए। PIB रिलीज़ के अनुसार 57th meeting में कुछ स्पष्टीकरण आए, जैसे ईसबगोल (psyllium seeds) पर NIL GST और खिलौनों की सभी श्रेणियों पर लागू रेट, और कुछ चुनिंदा बदलावों की सिफ़ारिश हुई — जैसे re-treaded tractor tyres का रेट नए टायर के बराबर और EV से passenger transport पर 5% का विकल्प। ये नोटिफ़िकेशन के बाद ही लागू होंगे।
GST लेट फीस माफ़ी किसे मिलेगी?
Council ने सिफ़ारिश की है कि पिछले वित्तीय वर्ष में ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले करदाता, अगर धारा 39(1) का रिटर्न (जैसे GSTR-3B) उसी महीने के अंत तक भर दें जिसमें वह देय था, तो उस देरी पर लेट फीस नहीं लगेगी। उदाहरण: 20 तारीख़ की ड्यू डेट वाला रिटर्न 28 तारीख़ को भरा, तो लेट फीस माफ़। यह नोटिफ़िकेशन आने के बाद ही लागू होगा, तब तक मौजूदा लेट फीस लगती रहेगी।
क्या अब ₹10,000 से कम के मामले में GST नोटिस नहीं आएगा?
सिफ़ारिश यही है: धारा 73, 74 और 74A में संशोधन करके ₹10,000 से कम टैक्स (CGST + SGST + IGST + Cess मिलाकर) पर show cause notice जारी नहीं होगा। जो नोटिस और अपील इस सीमा से कम राशि के हैं और प्रावधान लागू होने के दिन लंबित हैं, उनका फ़ैसला भी ऐसे होगा मानो सीमा पहले से लागू थी। यह CGST Act में संशोधन से लागू होगा।
57th GST Council के फ़ैसले कब से लागू होंगे?
ज़्यादातर फ़ैसले सिफ़ारिशें हैं और नोटिफ़िकेशन, सर्कुलर या CGST Act में संशोधन के बाद लागू होंगे — संसद से संशोधन में समय लग सकता है। जिनकी तारीख़ बताई गई है: inverted duty refund में input services का ITC 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर; capital goods के ITC का refund 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर; और रिटर्न में liability व ITC सुधारने का नया तरीका अप्रैल 2027 के रिटर्न से।
क्या अब free samples पर ITC मिलेगा?
Council ने धारा 17(5) में संशोधन की सिफ़ारिश की है, जिससे free samples, outdoor catering, health और life insurance, कारख़ाने के बाहर बिछी पाइपलाइन, टेलीकॉम टावर, और क़ानूनन shelf life ख़त्म होने पर नष्ट या write-off किए गए सामान पर ITC की रोक हटेगी। यह संशोधन लागू होने तक मौजूदा नियम चलता है: free samples पर लिया गया ITC अभी भी रिवर्स करना होगा।
ARQP scheme क्या है?
ARQP यानी Annual Return Quarterly Payment — एक वैकल्पिक स्कीम, जिसके concept note को Council ने सैद्धांतिक मंज़ूरी दी है। यह उन करदाताओं के लिए होगी जिनका पिछले वर्ष का टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है और जो सिर्फ़ unregistered ग्राहकों को (B2C) बेचते हैं। नाम के अनुसार इसमें रिटर्न साल में एक बार और टैक्स तिमाही में भरा जाएगा, लेकिन विस्तृत नियम अभी आने बाकी हैं।